मध्यप्रदेश का बजट, देवास शहर को दिलासा
देवास(चेतन राठौड़)।मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार का बजट आया और कागज़ों पर विकास ऐसी रफ्तार से दौड़ा कि आंकड़े पढ़ते-पढ़ते ही सड़कें बनती नजर आने लगीं। देवास जिले के लिए 110.67 करोड़ रुपए से 247.65 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का प्रावधान यानी गांवों तक विकास एक्सप्रेस रवाना।लेकिन जैसे ही नजर देवास शहर पर गई… ब्रेक लग गए।
पूरी तरह शहरी देवास विधानसभा, जो उज्जैन की दहलीज है,सिंहस्थ जैसे महाआयोजनों में प्रदेश का ट्रांजिट दरवाजा बनती है, उद्योगों का चेहरा कहलाती है उसके लिए बजट में अलग से एक लाइन तक नहीं।
मानो सरकार ने मान लिया हो कि देवास अब इतना विकसित हो चुका है कि यहां सड़क नहीं, सिर्फ सहनशक्ति चाहिए।सोनकच्छ, हाटपिपल्या, खातेगांव और बागली को गांव-गांव सड़कें मिल रही हैं स्वागत योग्य फैसला। लेकिन देवास शहर शायद बजट बनाने वालों की नजर में समस्या मुक्त घोषित हो चुका है। यहां गड्ढे नहीं, शायद प्राकृतिक धरोहर हैं टूटी सड़कें नहीं, लोकतांत्रिक यादगारें हैं।
अब सवाल जनता पूछ रही है क्या यह विकास का संतुलन है या राजनीतिक गणित का चयन?क्या यह संयोग है या फिर वही पुरानी नूरा कुश्ती, जिसमें शहर हर बार तालियां बजाता रह जाता है और सौगातें कहीं और चली जाती हैं।
विडंबना देखिए...भीड़ आए तो देवास याद आता है,ट्रैफिक बढ़े तो देवास जिम्मेदार,राजस्व की बात हो तो देवास अग्रणी लेकिन बजट की थाली सजी तो देवास का नाम ही गायब।
लगता है सरकार को भरोसा है कि देवास की जनता अब मांगना छोड़ चुकी है या फिर इतना सहनशील हो चुकी है कि गड्ढों में भी विकास खोज लेगी।

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