देवास न्यायालय का महत्त्वपूर्ण फैसला : फर्जी हिबानामा के आधार पर दायर सिविल वाद खारिज

देवास। देवास के पालनगर स्थित सर्वे नंबर 644 से संबंधित एक सिविल वाद में माननीय व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-2, देवास श्रीमती रश्मि अभिजीत मरावी साहब की अदालत ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए वादी मुबारिक खां मंसूरी द्वारा प्रस्तुत वाद को निरस्त कर दिया। प्रकरण क्रमांक आर.सी.एस.ए. 157/2022 में न्यायालय ने पाया कि वादी द्वारा कथित फर्जी हिबानामा के आधार पर दावा प्रस्तुत किया गया था। न्यायालय के समक्ष यह तथ्य भी रखा गया कि इसी सर्वे नंबर 644, पालनगर से संबंधित विवाद में वादी पूर्व में भी अपने उसी अधिवक्ता के माध्यम से देवास जिला न्यायालय के विभिन्न न्यायालयों में अलग-अलग वाद प्रस्तुत कर चुका था, जिन्हें पहले ही निरस्त किया जा चुका था। इसके बावजूद न्यायालय को भ्रमित कर पुनः वाद दायर किया गया। प्रतिवादी सीमा सोनी एवं राजेश सोनी की ओर से अधिवक्ता हर्षित गावशिन्दे ने प्रभावी पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष पूर्व में निरस्त किए गए वादों सहित अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों की दलीलों एवं उपलब्ध अभिलेखों पर विचार करने के बाद माननीय न्यायालय ने वादी का दावा स्वीकार करने से इंकार करते हुए वाद को निरस्त कर दिया

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