एक मंच… दो दावेदार… और एक ही पतंग
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| हिंदू उत्सव समिति के कार्यक्रम का दृश्य |
देवास(चेतन राठौड़)। मकर संक्रांति पर गजरा गियर्स चौराहा इस बार सिर्फ रंग-बिरंगी पतंगों से ही नहीं, बल्कि प्रेस नोटों की पतंगबाजी से भी गुलजार रहा। मंच एक, अतिथि वही, कार्यक्रम वही… लेकिन दावे दो-दो।मामला कुछ यूं रहा कि एक ही आयोजन ने दिन ढलते-ढलते दो अलग-अलग राजनीतिक रूप धारण कर लिए।
दरअसल,धर्मेंद्र सिंह बैस एवं हिंदू उत्सव समिति द्वारा वर्षों से प्रतिवर्ष मकर संक्रांति पर पतंग, चकरी और तिल-गुड़ वितरण का आयोजन किया जाता रहा है। परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी 14 जनवरी को स्टेशन रोड स्थित गजरा गियर्स चौराहे पर भव्य आयोजन हुआ। विधायक गायत्री राजे पवार, भाजपा जिला अध्यक्ष रायसिंह सेंधव,महापौर प्रतिनिधि दुर्गेश अग्रवाल,सभापति रवि जैन सहित कई जनप्रतिनिधियों ने पतंग उड़ाई, बच्चों को सामग्री बांटी और पर्व की खुशियां साझा कीं। शाम होते-होते बाकायदा हिंदू उत्सव समिति का प्रेस नोट भी मीडिया तक पहुंच गया।
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| शासन के आनंद उत्सव का दृश्य,जिसमें हिन्दू उत्सव समिति का फ्लेक्स लगा दिखाई दे रहा है |
लेकिन कहानी में ट्विस्ट यहीं से शुरू होता है…
कुछ ही समय बाद नगर निगम की ओर से दूसरा प्रेस नोट जारी हो गया, जिसमें उसी मंच, उन्हीं अतिथियों और उसी कार्यक्रम को शासन के निर्देशानुसार नगर निगम द्वारा आयोजित आनंद उत्सव बताया गया। फर्क सिर्फ इतना था कि अब मंच पर तिल-गुड़ के साथ आनंद उत्सव के फ्लेक्स भी आ गए, जिन्हें कुछ नेताओं के हाथों में थमा दिया गया।
अब शहर पूछ रहा है
यह कार्यक्रम हिंदू उत्सव समिति का था, या नगर निगम का आनंद उत्सव,या फिर दोनों का साझा राजनीतिक पतंगोत्सव?खास बात यह रही कि नगर निगम के प्रेस नोट में हिंदू उत्सव समिति का नाम नदारद रहा, जबकि मंच वही था,अतिथि वही थे और आयोजन भी वही। ऐसे में सवाल यह उठना लाज़मी है कि क्या नगर निगम ने आनंद उत्सव की खानापूर्ति के लिए हिंदू उत्सव समिति के मंच को अपना लिया?या फिर एक सफल सामाजिक आयोजन को बाद में सरकारी रंग देकर श्रेय लेने की कोशिश हुई?लेकिन राजनीतिक आसमान में अब भी सवालों की डोर उलझी हुई है।


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