धधकती धूनियों के बीच 41 दिन की तपस्या,
खड़े रहकर साधना करेंगे बालयोगी संतोष नाथ महाराज
देवास। सद्गुरू योगेंद्र शीलनाथ जी महाराज धूनी परिसर, मल्हार देवास एक बार फिर कठिन तपस्या और आध्यात्मिक साधना का केंद्र बनने जा रहा है। शीलनाथ भक्त मण्डल सचिव राहुल शर्मा ने बताया कि हरियाणा के हिसार जिले के सुल्तानपुर गांव स्थित नाथ संप्रदाय के प्राचीन मठ के गादीपति महंत बालयोगी संतोष नाथ महाराज यहां 20 मई से 29 जून तक 41 दिवसीय पंच धूनी और खड़ी तपस्या करेंगे। प्रतिदिन सुबह 11 बजे से दोपहर 2.15 बजे तक चलने वाली इस विशेष तपस्या में महाराज पांच स्थानों पर जलती धूनी के बीच बैठकर ध्यान-साधना करेंगे। तपस्या के पहले दिन वे 28-28 कंडों के बीच साधना आरंभ करेंगे और इसके बाद प्रतिदिन कंडों की संख्या बढ़ाई जाएगी। लगातार 41 दिनों तक चलने वाली यह कठिन साधना श्रद्धालुओं और साधकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। महाराज इस बार वे हरियाणा के सुल्तानपुर से दो कंटेनर भरकर कंडे अपने साथ लेकर आए हैं, ताकि तपस्या बिना किसी बाधा के निरंतर चल सके। नाथ संप्रदाय में पंच धूनी तपस्या को अत्यंत कठिन और दुर्लभ साधना माना जाता है।
श्री शर्मा ने आगे बताया कि बालयोगी संतोष नाथ महाराज पिछले 19 वर्षों से यह तपस्या करते आ रहे हैं। धधकती अग्नि के बीच घंटों ध्यान लगाना और खड़े रहकर साधना करना सामान्य साधकों के लिए बेहद कठिन माना जाता है। सुल्तानपुर गांव में नाथ संप्रदाय का करीब 800 वर्ष पुराना प्राचीन मठ स्थित है, जिसे शीलनाथ गुरू गादी के नाम से जाना जाता है। यही स्थान श्रीमंत सद्गुरू योगेंद्र शीलनाथ जी महाराज का गुरु स्थान भी है। मान्यता है कि गुरु महाराज ने यहीं इलायची नाथ जी महाराज से शिक्षा और दीक्षा प्राप्त की थी। वर्तमान में इस मठ के गादीपति महंत बालयोगी संतोष नाथ जी महाराज हैं। 20 मई से प्रारंभ होने वाली यह तपस्या देवास के धार्मिक वातावरण को एक बार फिर आस्था और साधना से ओतप्रोत कर देगी। भक्त मण्डल ने नगर सहित प्रदेशभर के भक्तों से आग्रह किया है कि अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर गुरू महाराज की तपस्या का दर्शनलाभ लेवे।

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